रबी और खरिफ़ फ़सल

रबी व खरीफ़ की फसलें (Rabi and Kharif Crops)

फ़सलों को मुख्यत: दो भागों में बाँटा गया है :-
खरिफ़ और रबी , ये दोनो शब्द अरबी भाषा से लिये गये है जिनमे खरिफ़ का अर्थ मानसून के आगमन से मेल खाता है और रबी का अर्थ मानसून के खत्म होने से मेल खाता है |

खरिफ़ फ़सल :-

ये फ़सल मॉनसून के आगमन के वक्त (मई से जुलाई माह तक) बोई जाती है..इस कथन से हम समझ जाते है कि खरीफ फसल में कौनसी फसलें आती है जैसे की नरमा , कपास , धान , मक्का, गन्ना , मूंगफली , अरहर , उड़द , चन्ना , जवार , मूंग , सोयाबीन आदि |
खरीफ़ की फसल जैसे नरमा की फसल में हरा तेला नामक कीट की रोकथाम के लिए के बारे में जान ने के लिए यहाँ क्लिक करें

इन फसलों को बारिश की अधिक आवश्यकता होती है इसलिए इनकी बीजाई मॉनसून में होती है और जैसे ही मॉनसून खत्म होने का वक़्त आता है ये पक कर तैयार हो जाती है और इनकी कटाई की जाती है।
मौसम का अहम योगदान होता है इन फसलों में होने वाले रोग के आने और उसके नियंत्रण में |

रबी फसल :- 

ये फसल मॉनसून के खत्म होने वाले वक़्त (नवंबर माह में ) बोई जाती है..इससे हमें पता  चलता है कि इसमें आने वाली फसल कौन कौन सी हो सकती है जैसे कि मुख्यतः गेहुँ(कणक) , सरसों , जौ , जोई , अलसी , धनिया , गाज़र, आलू , प्याज़ , टमाटर , मटर आदी ।

इन फसलों को बारिश की कम आवश्यकता होती है और अधिक बारिश होने से ये खराब भी हो जाती है… इन फसलों की पैदावार मुख्यतः खरीफ़ समय में हुई बरसात ओर भी निर्फ़र करती है..जैसे उस समय का बारिश का पानी जमीन में जाता है ये फसल उसका प्रयोग करती है।

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