देश में बढ़ रही है सागवान नीलगिरी और खम्हार की मांग

स्वागत है आपका खेती किसान पृष्ठ पर सागवान नीलगिरी और गम्हार की बढ़ती मांग को लेकर जानकारी प्राप्त करने के लिए ।

नीलगिरी सागवान और गम्हार की बढ़ती मांग 

इन वर्षों में सागवान और निलगीरी के पेड़ों की कटाई बहुत तेज़ी से हो रही है जिसकी वजह से इनकी लकड़ी मिलना बहुत मुश्किल होता जा रहा है तो आज हम यहाँ जानेंगे की कितनी कमाई देती है इनकी लकड़ियाँ । 

सागवान की जानकारी : Teak Plant 

सागवान जिसे अङ्ग्रेज़ी में टीक (teak) कहा जाता है जिसकी प्रजाति टेक्टोना
ग्रैंडिस (Tectona grandisएक उष्णकटिबंधीय दृढ़ लकड़ी की
प्रजाति है जो पौधे लगाने वाले प्लामियासी में रखी जाती है। टेक्टोना ग्रैंडिस एक
बड़ा, पर्णपाती पेड़ है जो मिश्रित दृढ़ लकड़ी के जंगलों में
होता है। 
देश में बढ़ रही सागवान लकड़ी की मांग है कमाई का साधन , Teak Plant
Image : Teak plant (सागवान)

इसमें छोटे, सुगंधित सफेद फूल और बड़े पेपर
पत्तियां होती हैं जो अक्सर निचली सतह पर बालों वाली होती हैं। इसे कभी-कभी “बर्मी
टीक” के रूप में भी जाना जाता है। टीक की
लकड़ी में चमड़े की तरह गंध होती है जब यह ताजा मिल जाती है। 

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यह विशेष रूप से इसकी
स्थायित्व और जल प्रतिरोध के लिए मूल्यवान है, और इसका
उपयोग नाव निर्माण, बाहरी निर्माण, लिबास, फर्नीचर, नक्काशी, मोड़, और
अन्य छोटी लकड़ी परियोजनाओं के लिए किया जाता है।टेक्टोना
ग्रैंड दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया, मुख्य रूप से भारत, श्रीलंका, इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, म्यांमार
और बांग्लादेश के मूल निवासी हैं, लेकिन अफ्रीका और कैरिबियन के कई
देशों में प्राकृतिक और खेती की जाती है। म्यांमार के सागौन जंगलों में दुनिया के
स्वाभाविक रूप से होने वाली टीक का लगभग आधा हिस्सा है। 

आण्विक
अध्ययन से पता चलता है कि टीक की अनुवांशिक उत्पत्ति के दो केंद्र हैं; भारत
में और दूसरा म्यांमार और लाओस में।  “सीपी टीक” (“सेंट्रल
प्रांत” टीक) भारत के
केंद्रीय राज्यों से टीक का वर्णन है।  

  • “नागपुर टीक” एक
    और क्षेत्रीय भारतीय टीक है। यह शाखाओं के अंत में घने क्लस्टर (पैनिकल्स) में
    व्यवस्थित छोटे, सफेद फूल पैदा करता है। फूलों में
    दोनों प्रकार के प्रजनन अंग (सही फूल) होते
    हैं।
  • पिछले कई सालों में देश के जंगलों में सागवान की कटाई इतनी तेजी से हुई है की अब जंगलों में इन पेड़ों की संख्या बहुत कम हो गई है। जबकि सागवान की लकड़ी की गुणवता इतनी बेहतर होती है कि अब डिमांड प्रतिदिन तेजी से बढ़ रही है ।  
  • इसकी लकड़ी को ना तो दीमक लगती है और ना ही ये पानी में ख़राब होती है। इसलिए सागवान का इस्तेमाल फर्नीचर बनाने में बहुतायत किया जाता है । 
  • सागवान के पेड़ की आयु लगभग 200 साल से भी ज़्यादा की भी  होती है।

खेती कैसे होती है सागवान की ? 

सागवान के 1 एकड़ में 400 पौधे लगते है । 

कितनी लागत आती है सागवान की खेती में ?

इसमे एक एकड़ मे पौधे लगाने में कुल लागत 40 -45 हज़ार तक होती है । 

क्या कमाई होती है सागवान से ? 

इसके 1 पेड़ की कीमत 40 हज़ार तक होती है 400 पेड़ों से 1 करोड़ 20 लाख तक कमाई कर सकते है । 

नीलगिरी की जानकारी : Eucalyptus Plant 

  • नीलगिरी एक फूलों वाला झाड़िय पेड़ है जोकि दुनिया का सबसे ल्ंभा फूलों वाला पेड़ (पौधा) है और मुखत: औस्ट्रेलिया देश के जंगलों मे पाया जाता है । 
  • वहाँ 700 से अधिक
    प्रजातियों की नीलगिरी और सबसे मूल निवासी हैं , एक
    बहुत छोटी संख्या में पाए जाते हैं आसन्न क्षेत्रों में न्यू गिनी और इंडोनेशिया।
    । नीलगिरी प्रजाति की खेती व्यापक रूप में उष्णकटिबंधीय और शीतोष्ण दुनिया, सहित अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, भूमध्य बेसिन, मध्य पूर्व, चीन, और भारतीय उपमहाद्वीप में की जाती है । 

Image : Eucalyptus (नीलगिरी)

कुछ नीलगिरी प्रजातियों ने फूलों की खेती करने वाले लोग , विकास शौधकरताओं  का ध्यान अपनी और आकर्षित किया हुआ है जिसकी वजह इसका उपयोग प्राकर्तिक कीटनाशक के रूप में होना , मलेरिया की रोकथाम में होना है । 

जिन क्षेत्रों में औसत तापमान 30 -35 डिग्री तक पाया जाता है वह क्षेत्र नीलगिरी की खेती के लिए उपयुक्त माना जाता है. इस पौधे का विकास बीजों तथा कलम दोनों ही बिधियों से किया जाता है। इसके पौधे की लम्बाई ज़्यादा होने की कारण इसे जमीन के गहराई में रोपा जाता है. पौधे के उचित विकास के लिए इन्हें पर्याप्त मात्रा में सूर्य का प्रकाश, हवा और पानी की जरूरत होती है.

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खेती कैसे होती है नीलगिरी की ? 

नीलगिरी के 1 एकड़ में 500 पौधे लगते है । 

कितनी लागत आती है नीलगिरी की खेती में ? 

मिट्टी तैयार करने में कुल लागत 55-70 हज़ार तक की लग जाती है । 

कमाई कितनी हो सक्ति है इसकी खेती से ? 

1 पेड़ की बाजार में कीमत लगभग 30 हज़ार होती है, 10 साल में 1.5  करोड़ तक कमाया जा सकता है। 

गम्हार (खम्हार)की जानकारी : Gmelina Plant 

खम्हार एक ऐसा पेड़ होता है जो पांच
साल में बिक्री के लिए तैयार हो जाता है। इसकी लकड़ी सागौन की तरह होती है। दरअसल
इमारती लकड़ी के लिए किसान सागौन एवं खम्हार लगाते है जहां सागौन लगाने के बाद उसको
काटने की अनुमति वन विभाग से लेनी पड़ती है
,वहीं इसकी बिक्री खुले
बाजार में नहीं की जाती है तथा वन विभाग ही खरीदता है। इसके चलते इमारती लकड़ी का
उत्पादन करने वाले खम्हार की खेती में ज्यादा रूचि ले रहे है। वहीं सागौन बिक्री
के लायक 8 साल लगते है जबकि खम्हार 5 साल में तैयार
हो जाता है।
खम्हार कैसे बन रहा है कमाई का सौदा
खम्हार 

  • खम्हार के पेड़ को किसान क्षेत्रीय
    भाषा में खम्हेर, गम्हारी, गम्हार, सिवन
    आदि नाम से भी जाना जाता है तथा पूर्वी तथा पश्चिमी मध्य प्रदेश की जलवायु इसके
    लिए उपयुक्त है। आरा मिल वाले 1 मीटर से अधिक गोलाई वाले लकड़ी 15-20 हजार
    रुपए घन मीटर के हिसाब से खरीदते है। इस पेड़ को तैयार होने में 15-20 साल
    लग जाते है किन्तु किसान 5 साल में ही इसे बेच देते है।
  • ये इलाके हैं उपयुक्त : जलवायु के हिसाब से मंडला, डिंडौरी, सीधी, उमरिया, सिंगरौली, शहडोल
    कैमोर, उमरिया, सतना कटनी, जबलपुर
    नरसिंहपुर सिवनी सहित समस्त पूर्वी मध्य प्रदेश खम्हार की खेती के लिए उपयुक्त है
    जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश के होशंगाबाद, बैतूल, सीहोर, भोपाल, रायसेन, विदिशा,गुना, अशोकनगर
    की मिट्टी एवं जलवायु इसके लिए उपयुक्त समझी जाती है। 
इसके पत्तों का इस्तेमाल दवाई बनाने में किया जाता है. यह अलसर जैसी समस्या से राहत दिलाने में बहुत फायदेमंद है.

खेती कैसे करें खम्हार की ?

खम्हार (गम्हार) के 1 एकड़ में 500 पौधे लगाए जाते है । 

कितनी लागत आती है ?

इसमें कुल लागत 40 -55 हज़ार तक लगती है । 

क्या कमाई जो सकती है खम्हार से ? 

इस पेड़ की कमाई लकड़ी की गुणवाता पर निर्भर होती है 1 एकड़ में लगे पेड़ कुल एक करोड़ की कमाई करते है । 
Note : उपरोक्त जानकारी विभिन्न सोरसेस से जुटाई गयी है , खेती किसान किसी तथ्य का उतरदाई नहीं है । 
विशेष : यदि कोई व्यक्ति किसी तरह की खेती से जुड़ी जानकारी पोस्ट खेती किसान में करना चाहता है तो 8742853342 व्हाट्स एप पर संपर्क कर सकता है , उसका नाम यदि वो चाहेगा तो दिया जाएगा पोस्ट के औथर में । 

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