MSP(Minimum Support Price) : न्यूनतम समर्थन मूल्य – क्या सरकार प्रत्येक किसान को लाभान्वित कर पायेगी ?

MSP(Minimum Support Price) : न्यूनतम समर्थन मूल्य 

क्या सरकार प्रत्येक किसान को लाभान्वित कर पायेगी ?

केंद्र
सरकार ने किसानों से खरीद की नई नीति पर मुहर लगा दी है. इसके
तहत तिलहन की खेती करने वाले किसानों को मिनिमम सपोर्ट प्राइस (एमएसपी) से
कम कीमत मिलने पर सरकार इसकी भरपाई करेगी.
वहीं, राज्य
सरकारों के ज़िम्मे प्राइवेट सेक्टर के निवेशकों को किसानों की खरीद के लिए राज़ी
करने का काम होगा. पीएम मोदी के नेतृत्व में हुई
मत्रिमंडल की एक बैठक में इस फैसले पर मुहर लगाई गई ।
इस
पोस्ट को लास्ट तक पढ़े , अंतिम में msp का
एक रुझान दिया गया है मूंग की खरीद को लेकर ।

इतिहास :- 

आज
की बात नहीं है बल्कि ये उस दिन से भारत में चलता आ रहा है जब एक डॉलर का मूल्य एक
रुपए के बराबर था , भारत में योजनाए बनाई जाती है सरकार
द्वारा , उन्हें लागू करने को कहा जाता है
लेकिन वो योजनाए सिर्फ एक योजना मात्र की बनकर रह जाती है , उनका
लाभ एक गरीब , एक मजदूर , एक
किसान , कहने का तातपर्य एक आम आदमी तक नही पहुंच पाती , एक
आम आदमी उनसे लाभान्वित नहीं हो पाता क्यूंकि सरकारें अपनी कमजोरियों के कारण असफल
हो जाती हैं । और बस इन्हीं के चलते जो भारत कृषि प्रधान देश है , जिस
भारत की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा किसान और उसकी उपज है उसी भारत में सबसे
कमज़ोर वयक्ति वही किसान है जिसका परिणाम हम सब देख ही रहे हैं कि जो 1 डॉलर 1 रुपये
के बराबर था वो आज 70-72 रुपये के बराबर है ।
आज
बहुत से लोग ये चर्चा कर रहें हैं कि किसान का कर्जा माफ होना चाहिए , किसान
को लोन न्यूनतम दर पर उपलब्ध होना चाहिए लेकिन कोई भी उस कारण पर चर्चा नही करना
चाहता जिसकी वजह से किसान की ये हालत हुई
, कोई भी उस कारण पर
कार्य नही करना चाहता जिसकी वजह से एक किसान इतना कमजोर हो गया है आज । अभी हाल ही
में भारत सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर 2 बड़ी घोषणा
की थी जानते ह उनके बारे में –

केंद्र सरकार (मोदी सरकार ) की घोषणा :-

इस
साल के बजट में क्रेंद सरकार ने ये घोषणा की थी कि किसानों को न्यूनतम समर्थन
मूल्य (एमएसपी) दिलाने के लिए सरकार सार्थक नीति लागू
करेगी. इसके लिए सरकार ने इसके थिंक टैंक नीति आयोग से कहा था कि
वो केंद्र और राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ बातचीत कर ऐसी नीति तैयार करे.
केंद्रीय
कृषि मंत्रालय ने इसी से जुड़ा अन्नदाता मूल्य संरक्षण योजना नाम का प्रस्ताव
तैयार किया था जिसे कैबिनट के सामने पेश किया गया. इस पर चर्चा
के बाद कैबिनेट ने इसे मंज़ूरी दे दी. नई पॉलिसी के तहत खरीद कीमतों के
एमएसपी से नीचे गिरने की स्थिति में राज्य सरकारों को कई स्कीमें उपलब्ध कराई
जाएंगी जिनमें उनके पास परिस्थिति के हिसाब से सही स्कीम चुनने का विकल्प होगा.
MSP-न्यूनतम-समर्थन-मूल्य
MSP-न्यूनतम-समर्थन-मूल्य

 क्या होगा इस नीति के तहत :-

इस
नीति के तहत तिलहन की खेती करने वाले किसानों के लिए तय किया गया है कि उन्हें
एमएसपी में होने वाले घाटे की भरपाई केंद्र सरकार करेगी. ऐसी
ही एक योजना मध्य प्रदेश में मौजूद है. योजना का नाम ‘भावांतर
भुगतान योजना’ है. इसी की तर्ज
पर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर तिलहन बेचने पर होने वाले घाटे की भरपाई अब सरकार
करेगी. इसकी कीमत होलसेल मार्केट की कीमत से तय की जाएगी. वहीं, ये
किसी भी राज्य में हुए कुल उत्पादन के
25 फीसदी पर लागू होगी.
वहीं, राज्यों
को ये विकल्प दिया गया है कि वो इसी तरह की खेती के उत्पाद के लिए राज्य में निजी
व्यापार करने वाले व्यपारियों को भी पायलट प्रोजेक्ट के तहत खरीद के लिए तैयार कर
सकती है. तिलहन पर सरकार का ज़ोर इसलिए है
क्योंकि सरकार खाने बनाने वाले तेल के आयात को कम करना चाहती है.

 एफ़ सी आई (फूड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया )

आपको
बता दें कि एफ़ सी आई (फूड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया ) सरकार की
नोडल एजेंसी है. इसका काम एमएसपी की कीमत पर गेहूं और
चावल की खरीद करना है. सरकारी कीमत पर खरीदे गए इस गेहूं और
चावल का इस्तेमाल राशन की दुकानों के सहारे लोगों तक इसे पहुंचाने में किया जाता
है. केंद्र की मार्केट इंटरवेंशन स्कीम नाम की एक और योजना है. इसके
तहत सरकार उन अनाजों की खरीददारी करती है जो आसानी से खराब हो सकते हैं लेकिन
एमएसपी के भीतर नहीं आते.
एमएसपी
के तहत सरकार उन 23 नोटिफाइड अनाजों की कीमत तय करती हैं
जो खरीफ और रबी के मौसम में उगाई जाती हैं.
आपको ये भी बता दें कि
भारत हर साल 14-15 मिलियन खाने के तेल का आयात करता है. ये
घरेलू मांग का कुल 70 फीसदी है.
आम
चुनावों से एक साल पहले किसानों को राहत में,
सरकार ने फसलों के लिए
नई खरीद नीति को मंजूरी दे दी है। इसके अलावा, मंत्रिमंडल
ने उन कीमतों को बढ़ाने की मंजूरी दे दी है,
जिन पर तेल विपणन
कंपनियां चीनी मिलों से इथेनॉल खरीदकर
47.13 रुपये प्रति लीटर
से 59.13 रुपये प्रति लीटर हो जाएंगी।
सरकार
ने 22 फसलों के लिए एमएसपी में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी की घोषणा के
तुरंत बाद प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई में एक नई खरीद नीति की घोषणा की
थी।
नई
तंत्र फसल विशिष्ट होने की उम्मीद है। यह मौजूदा तंत्र से एक महत्वपूर्ण प्रस्थान
को चिह्नित करेगा, जिसके अंतर्गत सरकार द्वारा फसलों को
खरीदा जाता है और एमएसपी मूल्य प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से किसानों के
खाते में स्थानांतरित किया जाता है।

राज्य सरकारे 

मध्य
प्रदेश सरकार ने सोयाबीन के लिए बीबीवाई की पायलट परियोजना लागू की थी, जिसके
तहत उसने बाजार मूल्य और एमएसपी के बीच सीधे किसानों के बीच अंतर का भुगतान किया
था। हालांकि, इसने खजाने को भारी खर्च किया और आरोप
थे कि व्यापार / प्रोसेसर ने एमएसपी से कम रखने के लिए
कीमतों में  छेड़ छाड़ की |
खरीफ
मूंग महाराष्ट्र बाजारों में पहले से ही पहुंचने शुरू हो चुका है और कीमतें एमएसपी
की तुलना में 25% से 40% कम है।
एमएसपी में खरीदने में असमर्थ व्यापारियों और सरकारी कार्रवाई के डर के लिए बाजार
मूल्य पर भी खरीदने से इंकार कर रहे हैं,
किसान अब मुंग बेचने में
असमर्थ हैं।
हालांकि अब तक मंडियो में आवक इतनी नहीं बढ़ी है फिर भी मध्य प्रदेश जैसे राज्य जहां आवक सुरू हुई है , वहाँ अभी से ऐसा हाल है तो अब देखना ये होगा की सरकार इस बार कोई कामयाबी का तरीका ढूंढ पाती है या पहले की योजनाओ की तरह असफल ही रहती है |
मेरा निजी सुझाव तो यही है की राज्य सरकार मंडी में बैठे व्यापारी भाइयो द्वारा खरीद करवाए और विक्रय पर्ची की तर्ज़ पर किसान को फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे बिकने पर उस हानी की भरपाई सीधा किसान के खाते में डाले | 

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